गुरु अस्त 2026: 15 जुलाई से 9 अगस्त तक देवगुरु बृहस्पति रहेंगे अस्त, जानें कौन-कौन से शुभ कार्य रहेंगे वर्जित

गुरु अस्त 2026

देवगुरु बृहस्पति को वैदिक ज्योतिष में शुभता, धर्म, ज्ञान, विवाह, संतान, संस्कार और मांगलिक कार्यों का प्रमुख कारक माना गया है। जब बृहस्पति अस्त (हस्तांगत) होते हैं, तब उनका शुभ प्रभाव क्षीण हो जाता है। इसी कारण शास्त्रों में गुरु अस्त की अवधि में अनेक शुभ एवं मांगलिक कार्यों को वर्जित बताया गया है।

वर्ष 2026 में देवगुरु बृहस्पति 15 जुलाई 2026 से 9 अगस्त 2026 तक अस्त रहेंगे। यदि आप विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन या अन्य शुभ कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो इस अवधि का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।

गुरु अस्त 2026 की तिथि

– गुरु अस्त प्रारंभ: 15 जुलाई 2026
– गुरु उदय: 9 अगस्त 2026

मुहूर्त शास्त्र के अनुसार केवल गुरु अस्त की अवधि ही नहीं, बल्कि—

– अस्त होने से 3 दिन पूर्व – वृद्धत्व दोष
– उदय होने के 3 दिन बाद तक – बालत्व दोष

भी माना जाता है। इसलिए व्यवहार में 12 जुलाई 2026 से 12 अगस्त 2026 तक शुभ मुहूर्तों का अभाव माना जा सकता है। इस अवधि में प्राप्त होने वाले मुहूर्त भी गुरुबल-विहीन माने जाते हैं।

गुरु अस्त क्या होता है?

ज्योतिष के अनुसार जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यधिक समीप पहुंच जाता है, तब सूर्य के तेज के कारण उसका प्रभाव पृथ्वी से क्षीण हो जाता है। इस स्थिति को ग्रह अस्त या हस्तांगत कहा जाता है।

देवगुरु बृहस्पति के अस्त होने पर विवाह, धर्म और मांगलिक कार्यों में उनका शुभ प्रभाव कम हो जाता है। इसी कारण मुहूर्त शास्त्र में इस अवधि में नए शुभ कार्यों से बचने का निर्देश दिया गया है।

गुरु अस्त के दौरान कौन-कौन से कार्य वर्जित हैं?

मुहूर्त चिंतामणि में गुरु अस्त के संबंध में निम्नलिखित श्लोक प्राप्त होता है—

«वाप्यारामतडागकूपभवनारम्भप्रतिष्ठेव्रतारम्भोत्सर्गवधूप्रवेशनमहादानानि सोमाष्टके।
गोदानाग्रयणप्रपाप्रथमकोपाकर्म वेदव्रतं
नीलोद्वाहमथातिपन्नशिशुसंस्कारान् सुरस्थापनम्॥»

इस शास्त्रीय निर्देश के अनुसार गुरु अस्त की अवधि में सामान्यतः निम्न कार्यों से बचना चाहिए—

– विवाह संस्कार
– गृह प्रवेश
– भूमि पूजन एवं भवन निर्माण का शुभारंभ
– यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार
– मुंडन संस्कार
– कर्णवेध संस्कार
– देव प्रतिष्ठा
– वेदाध्ययन एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ
– गुरु दीक्षा ग्रहण
– पहली बार किसी महत्वपूर्ण तीर्थ यात्रा का आरंभ
– बड़े दान एवं मांगलिक उत्सव

श्रावण मास 2026 में क्यों रहेगा शुभ मुहूर्तों का अभाव?

इस वर्ष श्रावण मास के प्रारंभिक भाग में देवगुरु बृहस्पति अस्त रहेंगे। इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन तथा अन्य मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त मुहूर्त उपलब्ध नहीं होंगे। यदि कहीं मुहूर्त दिखाई भी दे, तो वह गुरुबल के अभाव के कारण पूर्ण रूप से शुद्ध नहीं माना जाएगा।

इसी कारण जिन लोगों ने किसी शुभ कार्य की योजना बनाई है, उन्हें यथासंभव 15 जुलाई 2026 से पहले कार्य संपन्न करने का प्रयास करना चाहिए।

गुरु उदय के बाद कब से मिलेंगे शुभ मुहूर्त?

देवगुरु बृहस्पति 9 अगस्त 2026 को उदित होंगे। हालांकि मुहूर्त शास्त्र के अनुसार उदय के बाद भी तीन दिनों तक बालत्व दोष रहता है। इसलिए सामान्यतः 12 अगस्त 2026 के बाद शुभ एवं मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्तों पर विचार किया जाता है।

निष्कर्ष

देवगुरु बृहस्पति का अस्त होना वैदिक ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। 15 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक गुरु अस्त रहेंगे और इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, यज्ञोपवीत, मुंडन, कर्णवेध तथा अन्य मांगलिक कार्यों से यथासंभव बचना चाहिए। यदि किसी विशेष परिस्थिति में शुभ कार्य करना आवश्यक हो, तो योग्य एवं विद्वान ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेकर ही निर्णय लें।

धर्मशास्त्रों के अनुसार उचित मुहूर्त में किया गया कार्य दीर्घकाल तक शुभ फल प्रदान करता है। अतः गुरु अस्त और उससे संबंधित दोषों का ध्यान रखते हुए ही किसी भी महत्वपूर्ण कार्य का शुभारंभ करना श्रेयस्कर माना गया है।

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