Shraddh Kab Se Shuru Hai 2026? श्राद्ध 2026 कब से शुरू है? पितृ पक्ष की पूरी तिथि और श्राद्ध कैलेंडर

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष अर्थात श्राद्ध पक्ष का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह समय हमारे दिवंगत पूर्वजों अर्थात पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण व्यक्त करने का अवसर माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में विधि-विधान, श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान पितरों के निमित्त किया जाने वाला महत्वपूर्ण कर्म है। इस अवधि में पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा है।

लेकिन आखिर पितृ पक्ष क्या है? पार्वण श्राद्ध किसे कहते हैं? श्राद्ध किस तिथि को किया जाता है? श्राद्ध किस समय करना चाहिए? और 2026 में पितृ पक्ष कब से शुरू होगा?

आइए इन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों को सरल भाषा में समझते हैं।

पितृ पक्ष क्या है?

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा के बाद आने वाला कृष्ण पक्ष पितरों को समर्पित माना जाता है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत परंपरा में इसे सामान्यतः आश्विन कृष्ण पक्ष के रूप में जाना जाता है।

इस अवधि में दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी तथा अन्य पूर्वजों के निमित्त उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त होती है और परिवार के लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं।

‘श्रद्धया इदं दीयते इति श्राद्धम्’ — अर्थात श्रद्धा से जो अर्पित किया जाए, उसे श्राद्ध कहा गया है।

इसलिए श्राद्ध कर्म का मूल भाव केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता है।

पार्वण श्राद्ध क्या होता है?

पितृ पक्ष में किए जाने वाले श्राद्ध को सामान्यतः पार्वण श्राद्ध कहा जाता है।

पार्वण श्राद्ध में पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण, भोजन, दान आदि कर्म किए जाते हैं। धार्मिक परंपरा में इन कर्मों को पितरों की तृप्ति और उनके प्रति सम्मान से जोड़ा गया है।

पितृ पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि किसी पितर की मृत्यु तिथि ज्ञात है, तो सामान्यतः उसी तिथि के अनुसार पितृ पक्ष में श्राद्ध करने की परंपरा मानी जाती है।

उदाहरण के लिए यदि किसी पूर्वज का देहांत कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था, तो पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि को उनके निमित्त श्राद्ध किया जाता है।

श्राद्ध किस समय करना चाहिए?

पार्वण श्राद्ध के लिए अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है—

«पूर्वाह्णे मातृकं श्राद्धमपराह्णे तु पैतृकम्।
एकोदिष्टं तु मध्याह्ने प्रातर्वृद्धि नैमित्तिकम्॥»

अर्थात पितरों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध में अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया गया है।

इसलिए केवल तिथि ही नहीं, बल्कि स्थान के अनुसार श्राद्ध का उचित मुहूर्त और अपराह्न काल भी ध्यान में रखना चाहिए।

श्राद्ध के समय में स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए वास्तविक श्राद्ध मुहूर्त के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग या योग्य आचार्य से समय अवश्य निर्धारित करें।

2026 में पितृ पक्ष कब से शुरू होगा?

वर्ष 2026 में भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर, शनिवार को है और इसके अगले दिन 27 सितंबर 2026, रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष का नियमित क्रम प्रारंभ होता है।

ध्यान देने योग्य बात है कि 26 सितंबर का पूर्णिमा श्राद्ध पितृ पक्ष की नियमित कृष्ण पक्ष तिथियों में शामिल नहीं है, बल्कि यह भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध है। पूर्णिमा तिथि में दिवंगत हुए पितरों का महालय श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन करने की परंपरा भी बताई गई है।

श्राद्ध तिथि 2026: किस दिन कौन सा श्राद्ध होगा?

तारीख| वार| श्राद्ध
26 सितंबर 2026| शनिवार| पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर 2026| रविवार| प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर 2026| सोमवार| द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर 2026| मंगलवार| तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर 2026| बुधवार| चतुर्थी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2026| गुरुवार| पंचमी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2026| शुक्रवार| षष्ठी एवं सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2026| शनिवार| अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2026| रविवार| नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2026| सोमवार| दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2026| मंगलवार| एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2026| बुधवार| द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर 2026| गुरुवार| त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2026| शुक्रवार| चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026| शनिवार| सर्व पितृ अमावस्या

2026 की तिथियों के पंचांग विवरण के अनुसार प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक श्राद्ध क्रम 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है।

सर्व पितृ अमावस्या 2026

10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्व पितृ अमावस्या है। इसे पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है।

सर्व पितृ अमावस्या का विशेष महत्व उन परिस्थितियों में माना जाता है जब—

– किसी पितर की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो।
– किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध न किया जा सका हो।
– परिवार के किसी दिवंगत सदस्य का श्राद्ध करना रह गया हो।
– अमावस्या तिथि में दिवंगत हुए पितरों का श्राद्ध करना हो।

धार्मिक परंपरा के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, तो सर्व पितृ अमावस्या पर उनके निमित्त श्राद्ध किया जा सकता है।

पितृ पक्ष में क्या करना चाहिए?

पितृ पक्ष में अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निम्न कार्य किए जा सकते हैं—

1. पितरों का स्मरण

अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।

2. तर्पण

परंपरा के अनुसार जल, तिल आदि से पितरों का तर्पण किया जाता है।

3. पिंडदान

योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में पितरों के निमित्त पिंडदान किया जाता है।

4. ब्राह्मण भोजन एवं दान

अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन, वस्त्र, अन्न तथा आवश्यक वस्तुओं का दान करने की परंपरा है।

5. सेवा और सद्कर्म

जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना, अन्नदान करना और सेवा कार्य करना भी श्रद्धा एवं कृतज्ञता की भावना से किया जा सकता है।

क्या पितृ पक्ष में शुभ कार्य करने चाहिए?

पितृ पक्ष को मुख्य रूप से पितरों के स्मरण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित अवधि माना जाता है। इसलिए कई पारंपरिक परिवार इस अवधि में विवाह, गृहप्रवेश आदि मांगलिक संस्कारों को टालते हैं।

हालांकि सभी धार्मिक कार्यों के लिए एक समान नियम लागू नहीं होते। किसी विशेष पूजा, व्रत, संस्कार या मांगलिक कार्य के संबंध में निर्णय लेते समय स्थानीय पंचांग, परिवार की परंपरा और योग्य आचार्य की सलाह को ध्यान में रखना उचित है।

क्या श्राद्ध केवल बड़े पुत्र को ही करना चाहिए?

श्राद्ध कर्म के संबंध में अलग-अलग धर्मशास्त्रीय परंपराओं और पारिवारिक रीति-रिवाजों में विभिन्न नियम मिलते हैं। इसलिए इसे केवल एक व्यक्ति तक सीमित मानने के बजाय अपने कुलाचार और परंपरा के अनुसार श्राद्ध कर्म करना उचित है।

यदि परिवार में श्राद्ध की विधि को लेकर कोई विशेष परिस्थिति हो, तो योग्य आचार्य से परामर्श लेना चाहिए।

पितृ पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है?

पितृ पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और कृतज्ञता।

श्राद्ध केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि उन पूर्वजों को स्मरण करने का अवसर भी है जिनके कारण हमारा परिवार और हमारा वर्तमान अस्तित्व आगे बढ़ा।

इसलिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार पितरों का स्मरण करें, तर्पण करें, दान करें और जरूरतमंदों की सहायता करें।

2026 पितृ पक्ष: महत्वपूर्ण तिथियां एक नजर में

पूर्णिमा श्राद्ध: 26 सितंबर 2026
पितृ पक्ष प्रारंभ / प्रतिपदा श्राद्ध: 27 सितंबर 2026
पितृ पक्ष की अंतिम तिथि: 10 अक्टूबर 2026
सर्व पितृ अमावस्या: 10 अक्टूबर 2026
नवरात्रि प्रारंभ: 11 अक्टूबर 2026

निष्कर्ष

पितृ पक्ष हमारे जीवन में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। धार्मिक परंपरा के अनुसार पितरों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का विधान बताया गया है।

2026 में पितृ पक्ष का नियमित क्रम 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 को सर्व पितृ अमावस्या के साथ पूर्ण होगा। 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध है।

यदि आपको श्राद्ध की सही विधि, तर्पण की प्रक्रिया, पिंडदान की विधि या किसी विशेष तिथि के श्राद्ध के बारे में जानकारी चाहिए, तो अपने क्षेत्र के पंचांग एवं योग्य आचार्य से स्थानीय तिथि और मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें।

पितृ देवताओं का आशीर्वाद सभी पर बना रहे।
ॐ पितृभ्यो नमः।

Scroll to Top